23 जनवरी भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के रूप में मनाई जाती है। नेताजी का जीवन सिर्फ संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम का सबसे बड़ा उदाहरण रही है। बहुत कम लोग जानते हैं कि नेताजी एक समय British Government की सबसे बड़ी नौकरी – Indian Civil Service (ICS) में चयनित हो चुके थे, लेकिन उन्होंने उसे खुद छोड़ दिया। यह निर्णय उस दौर में लिया गया था जब ICS को पाना किसी सपने से कम नहीं था।

Why Did Netaji Leave The Job of ICS?
क्यों छोड़ी नेताजी ने ICS की नौकरी?
Write from Giriraj Radhika
जिस ICS की नौकरी के लिए लोग 4 साल तैयारी करते थे नेताजी ने 7 महीने में clear करके इस्तीफा दे दिया था। दोस्तों क्या आपको पता है, अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को offer किया था कि “यह जो सत्ता चल रही है इसमें हमारे साथ शामिल हो जाओ तुम भी लूटो हम भी लूटें।”
सारे क्रांतिकारियों ने साफ मना किया था कि तुम्हारी इस लुट की व्यवस्था में हमें शामिल नहीं होना। हमें तो संपूर्ण आजादी चाहिए संपूर्ण स्वराज्य चाहिए।
जिस क्रांतिकारी ने यह बात सबसे पहले कही थी, उन्हीं का नाम था नेताजी सुभाष चंद्र बोस। क्या आपको मालूम है उनके जीवन की विडंबना क्या थी, उनको आई सी एस (ICS) की नौकरी में select होना पड़ा सिर्फ उनके पिताजी की इच्छा की पूर्ति के लिए। पिता जी चाहते थे कि मेरा बेटा collector बने।
बेटे को बार-बार वह ताना मारते थे कि तू बन नहीं सकता, तू होशियार कम है, तेरे पास तैयारी नहीं है, इसलिए बहाना बनाता रहता है तो बेटे ने अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए परीक्षा दी। उस जमाने में ICS की परीक्षा देने के लिए 4-4 साल तक लोग पढ़ाई करते थे।
Netaji Subhash Chandra Bose ने सिर्फ 7 महीने पढ़ाई की थी। उतनी पढ़ाई में उन्होंने ICS के topper की list में चौथी position पाई थी। उस जमाने में ICS top करना किसी भारतीय लड़के के लिए संभव ही नहीं था क्योंकि इस परीक्षा में अंग्रेज top किया करते थे।वह पहले भारतीय व्यक्ति थे जिनको topper list में चौथा स्थान मिला।
बहुत मजेदार घटना है – कि जब वह London गए थे और Cambridge University में admission लेकर ICS की परीक्षा में बैठे थे। और जिस दिन result आया तो उनके सहयोगी result देखने के लिए गए थे लेकिन वह नहीं गए।
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जब उनके सहयोगियों ने नाम देखा तो नाम कहीं नहीं मिला और उनको आकर कहा कि तुम तो पास ही नहीं हुए, तो उन्होंने कहा ठीक है कोई बात नहीं पास नहीं हुआ।
लेकिन शाम को जब British Govt के department का Secretary आया नेताजी को बोला कि तुम्हारा नाम pass होने वालों में नहीं है ऊपर वाली list में है, वह list अभी तक लगी नहीं है।
अब सुभाष चंद्र बोस को दुविधा हो गई कि मैं तो ICS पास हो गया अब मुझे collector बनना पड़ेगा। Collector होने का मतलब भारतियों को लूटना पढ़ेगा।
और लूट का कुछ हिस्सा अंग्रेजों को देना पड़ेगा, तो उनके मन में यह शुरू हुआ कि या तो मैं इस लूट में शामिल हो जाऊं/लूट की व्यवस्था के बाहर निकल कर देश के लिए काम करूं।
अंत में उनके दिल ने कहा कि तुमको तो लूट में शामिल नहीं होना है क्योंकि तुम्हारा जन्म इसके लिए नहीं हुआ है, तब उन्होंने नौकरी को resigned(इस्तीफा) कर दिया।
जब उन्होंने इस्तीफा दिया था तो British system में हड़कंप मच गया था क्योंकि भारत के कई लड़के पहले ICS बन चुके थे। किसी में हिम्मत नहीं हुई थी इस्तीफा देने की, सुभाष चद्र बोस जी ने इस्तीफा दिया।
इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि मै इस तंत्र में शामिल इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि मेरी भारत माता की लूट के लिए यह तंत्र बना है।
मैं मेरे देश को लुटू यह मेरा दिल मुझे गवाही नहीं देता। इसलिए मै या ICS की नौकरी छोड़ रहा हूं। नेताजी ने resigned किया और बोरिया बिस्तर समेट के भारत आ गए।
पिताजी के दिल पर वज्रपात हो गया कि बेटे ने ICS को लात मार दी। तब बेटे ने पिता को समझाया कि मै हर बार इस नौकरी को तो लात ही मारूंगा क्योंकि जब तक यह व्यवस्था भारत को लूटने की व्यवस्था है, मैं इसमें शामिल नहीं हो सकता। इसलिए नेता जी ने ICS की नौकरी को छोड़ा और जैसे ही ICS छोडी तो सारा देश उनके लिए खड़ा हो गया।
जब वह London से वापस आए थे, उस समय पानी के जहाज चला करते थे जो बंबई में उतरे थे। जो हुजूम बंबई में निकला था वो तो गजब के लोग थे।
उन्होंने उसी दिन कह दिया था कि अब तो भारत आजाद हो जाएगा क्योंकि जब मुझे समर्थन देने के लिए इतने लोग भारत में है तो मैं जब गांव गांव जाऊंगा तब कितने लोग खड़े हो जाएंगे। उसी confidence से उसी आश्वासन पर उन्होंने इसे आगे बढ़ाया।
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नेताजी का वास्तविक इस्तीफा(Real Quote)
1921 में नेताजी ने British Government को अपना इस्तीफा भेजा।
उनके असली पत्र (Resignation Letter) का भावार्थ:
“मैं उस सेवा में नहीं रह सकता जिसका उद्देश्य मेरे देश को गुलाम बनाए रखना है। मेरा अंतःकरण इसकी अनुमति नहीं देता।”
(Original letter आज भी British archives में मौजूद है)
नेताजी का जीवन संदेश(Conclusion)
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन हमें सिखाता है:
“देश सबसे पहले आता है, नौकरी, पैसा और पद बाद में।”
आज जहां लोग करोड़ों की नौकरी के लिए सब कुछ छोड़ देते हैं, वहीं नेताजी ने दुनिया की सबसे बड़ी नौकरी छोड़कर देश को चुना।
यही कारण है कि नेताजी सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं।